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Bikaner News – मोबाइल की बैटरी फटने से लगी आग, तीन झुलसे

Bikaner News – मोबाइल की बैटरी फटने से लगी आग, तीन झुलसे

Bikaner News – बीकानेर में मोबाइल बैटरी फटने से पूरा झोपड़ा जल गया। दो मासूम बच्चे भी आग में झुलस गए। उन्हें बचाने गया युवक भी घायल हो गया। गनीमत रही हादसे में किसी की मौत नहीं हुई। शनिवार सुबह लूणकरनसर की हंसेरा ग्राम पंचायत की मेघवाल ढाणी में ये हादसा हुआ। इस दौरान झोपड़े में रखा अनाज और रुपए जलकर राख हो गए।

सुबह 10.30 बजे एक पुराने मोबाइल चार्जिंग में लगाया हुआ था। काफी देर चार्ज होने के बाद मोबाइल की बैटरी में विस्फोट हो गया। ये विस्फोट खींप (घास) से बने झोपड़े में हुआ। झोपड़े ने तुरंत आग पकड़ ली। महज तीन महीने की तपस्या पुत्री मुकेश और मानव (2) पुत्र मघाराम झोपड़े में सो रहे थे। आग लगने पर मुकेश झोपड़े में पहुंचा। मुश्किल से दोनों बच्चों को बाहर निकालकर लाया। इस दौरान मुकेश के हाथ जल गए। दोनों बच्चे भी आग की चपेट में आ गए थे। इन तीनों को अब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल पहुंचाया गया है। जहां इलाज चल रहा है।

तीनों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों की मदद से ही घायलों को बीकानेर के पीबीएम अस्पताल पहुंचाया गया है।

हंसेरा में रहने वाले सोहन राम मेघवाल के दो जवाई मुकेश और रमेश हैं। ये दोनों भाई भी हैं। दोनों जवाई फसल कटाई के लिए आए थे। शनिवार सुबह परिवार सहित ढाणी से कुछ दूर जो की फसल की कटाई कर रहे थे। मुकेश और रमेश की बहन सुलोचना भी साथ आई हुई थी। जो खाना बना रही थी। झोपड़े के पास ही खाना बनाते समय अंदर से एक चार साल का बच्चा भारती दौड़ता हुआ बाहर आया। उसने बताया- झोपड़े में आग लग गई। तब सुलोचना ने रमेश और मुकेश को आवाज देकर बुलाया। मुकेश ने आग की परवाह न करते हुए दोनों बच्चों को बाहर निकाल लिया।

आग से सामान जला

आग लगने के कारण घर का काफी सामान जलकर राख हो गया। इसमें सोने-चांदी के जेवर भी थे। इनकी कीमत करीब एक लाख रुपए आंकी जा रही है। इसके अलावा तीस हजार रुपए नकद थे, जो राख हो गए। वहां रखा मोबाइल भी पूरी तरह जल गया। झोपड़े में 4 कट्टे यूरिया, 1 कट्टा खल और एक क्विटल गेंहू भी जल गए। ऐसे में परिवार को आर्थिक नुकसान भी काफी हुआ है।

इसलिए होते हैं हादसे

दरअसल, गांवों और ढाणियों में लोग लकड़ी के बलों (लंबी व गोल लकड़ी) के साथ खींप (एक तरह की घास) के साथ झोपड़ी बनाते हैं। खींप की घास सूखने के बाद आग जल्दी पकड़ती है। ऐसे में इस खींप के पास एक चिंगारी पहुंचते ही आग लग जाती है। जब पूरा झोपड़ा ही खींप से बना होता है तो आग से निकल पाना मुश्किल होता है। बीकानेर में कई बार इस हादसे में लोगों की मौत हुई है। रुपए और अनाज जलकर राख हो गया। कई बार पशु भी जलकर राख हो जाते हैं।

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