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मोरिंगा अब सिर्फ हेल्थ फूड नहीं रहा: 2026 तक भारत में बन सकता है ₹12,000 करोड़ का सेक्टर

On: March 22, 2026 8:47 AM
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नई दिल्ली: कुछ साल पहले तक मोरिंगा सिर्फ आयुर्वेदिक दुकानों या गांवों की रसोई तक सीमित था। लेकिन 2025 के बाद तस्वीर तेजी से बदली है। आज मोरिंगा हेल्थ इंडस्ट्री, एग्री-स्टार्टअप्स और एक्सपोर्ट मार्केट का नया फोकस बन चुका है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो 2026 तक भारत में मोरिंगा आधारित प्रोडक्ट्स का बाजार ₹10,000–12,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

मोरिंगा क्यों बन रहा है अगला बड़ा सेक्टर?

भारत में तीन चीज़ें एक साथ बदली हैं:

मोरिंगा इन तीनों जरूरतों को एक साथ पूरा करता है। यही वजह है कि इसे अब सिर्फ “सुपरफूड” नहीं बल्कि Future Crop माना जा रहा है।

किसानों के लिए गेम-चेंजर कैसे?

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और राजस्थान के कई जिलों में किसान पारंपरिक फसलों के साथ मोरिंगा उगा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत:

कुछ किसानों का कहना है कि मोरिंगा ने उनकी इनकम को 30–40% तक स्थिर बनाया है, खासकर सूखे इलाकों में।

स्टार्टअप्स की एंट्री

2024 के बाद से मोरिंगा आधारित स्टार्टअप्स में निवेश बढ़ा है। पाउडर, कैप्सूल, टी-बैग्स से आगे बढ़कर अब:

ये सभी प्रोडक्ट्स शहरी उपभोक्ताओं को टारगेट कर रहे हैं, जहां हेल्थ पर खर्च बढ़ा है।

सरकार की भूमिका

हालांकि अभी मोरिंगा किसी अलग सरकारी स्कीम का हिस्सा नहीं है, लेकिन न्यूट्रिशन मिशन और आयुष सेक्टर में इसे लेकर चर्चा तेज़ है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में मोरिंगा को सरकारी पोषण कार्यक्रमों से जोड़ा जा सकता है।

क्या यह बुलबुला है?

हर नया ट्रेंड यही सवाल उठाता है। लेकिन मोरिंगा के मामले में फर्क यह है कि इसकी मांग सिर्फ मार्केटिंग पर नहीं, बल्कि न्यूट्रिशन और खेती दोनों पर आधारित है।

यही कारण है कि एक्सपर्ट इसे “Short-Term Trend” नहीं, बल्कि “Long-Term Transition” मानते हैं।

निष्कर्ष

मोरिंगा अब सिर्फ हेल्थ इंफ्लुएंसर्स की बात नहीं रहा। यह भारत की बदलती अर्थव्यवस्था, खेती और हेल्थ सोच का हिस्सा बन चुका है।

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