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सिर्फ Marriage Certificate से नहीं बनेंगे पति-पत्नी – Supreme Court का बड़ा फैसला | 2026

On: March 22, 2026 8:47 AM
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विवाह से जुड़े कानूनों को लेकर एक ऐतिहासिक और बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लेने से कोई भी जोड़ा कानूनी रूप से पति-पत्नी नहीं बन जाता।

अगर धार्मिक और कानूनी रस्में पूरी नहीं हुई हैं, तो शादी को वैध नहीं माना जाएगा, चाहे रजिस्ट्रेशन कराया गया हो या नहीं।


Supreme Court का बड़ा संदेश: शादी सिर्फ कागज नहीं, संस्कार है

देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विवाह केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा एक पवित्र बंधन है।

आज के समय में कई लोग वीजा, सरकारी योजनाओं और संपत्ति लाभ के लिए केवल मैरिज रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं, लेकिन कोर्ट ने इसे गलत करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा था, जहां एक संस्था द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र को चुनौती दी गई थी। जांच में सामने आया कि संबंधित जोड़े ने न तो धार्मिक रस्में निभाई थीं और न ही वैधानिक प्रक्रिया पूरी की थी।

इसके बावजूद उनका विवाह प्रमाण पत्र बना दिया गया था।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने इस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

Hindu Marriage Act क्या कहता है?

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 7 के अनुसार:

  • फेरे लेना अनिवार्य है
  • सप्तपदी जरूरी है
  • पंडित द्वारा मंत्रोच्चारण
  • सामाजिक स्वीकृति

जब तक ये रस्में पूरी नहीं होतीं, तब तक शादी को कानूनी मान्यता नहीं मिलती।

Marriage Registration का असली मतलब

अदालत ने साफ कहा कि रजिस्ट्रेशन सिर्फ सबूत होता है, शादी का आधार नहीं।

Hindu Marriage Act की धारा 8 के तहत:

  • रजिस्ट्रेशन = प्रमाण
  • रस्में = वैधता

अगर रस्में नहीं हुईं तो प्रमाण पत्र भी अमान्य हो जाएगा।

Special Marriage Act और Hindu Marriage Act में फर्क







बिंदु Special Marriage Act Hindu Marriage Act
धार्मिक रस्में जरूरी नहीं अनिवार्य
नोटिस पीरियड 30 दिन नहीं
रजिस्ट्रेशन मुख्य आधार केवल प्रमाण


कोर्ट ने क्यों रद्द किया Certificate?

सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 का इस्तेमाल करते हुए कहा:

  • कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं हुआ
  • कानूनी प्रक्रिया अधूरी
  • गलत तरीके से प्रमाण पत्र जारी

इसलिए विवाह प्रमाण पत्र को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।

युवाओं को Supreme Court की चेतावनी

कोर्ट ने युवाओं को संदेश दिया कि शादी को हल्के में न लें।

आजकल लोग सुविधा के लिए फर्जी विवाह या अधूरी शादियां कर रहे हैं, जो भविष्य में कानूनी संकट बन सकती हैं।

समाज पर क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद:


 महिला अधिकारों की सुरक्षा

अदालत के इस फैसले से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है।

अब कोई व्यक्ति केवल कागज दिखाकर महिला को धोखा नहीं दे सकेगा।

भविष्य में शादी से पहले ध्यान रखें ये बातें

  • धार्मिक रस्में पूरी करें
  • वैध पंडित से विवाह कराएं
  • फोटो/वीडियो रिकॉर्ड रखें
  • रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कराएं


Legal Experts की राय

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की पारिवारिक व्यवस्था को मजबूत करेगा।

अब कानून का दुरुपयोग मुश्किल होगा।

शादी मजाक नहीं, जिम्मेदारी है

Supreme Court का यह फैसला देशभर के युवाओं और परिवारों के लिए एक चेतावनी है कि विवाह केवल एक फॉर्मेलिटी नहीं, बल्कि आजीवन जिम्मेदारी है।

सिर्फ Certificate नहीं, संस्कार और कानून दोनों जरूरी हैं।


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