
बीकानेर: खेजड़ी बचाओ आंदोलन ने अब तेज़ रूप ले लिया है। महापड़ाव के दूसरे दिन भी 363 संत और पर्यावरण प्रेमी धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व स्वामी सच्चिदानंद कर रहे हैं।
लिखित आश्वासन पर अड़े संत
आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार खेजड़ी संरक्षण को लेकर लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। मौखिक वादों को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
खेजड़ी को बताया जीवनरेखा
संत समाज का कहना है कि खेजड़ी राजस्थान के रेगिस्तानी पर्यावरण की जीवनरेखा है। इसकी कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है और आने वाली पीढ़ियों को नुकसान होगा।
अवैध कटाई पर सख्त चेतावनी
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी अवैध कटाई हुई, तो इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी। किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सोलर कंपनियों पर आरोप
संतों ने सोलर कंपनियों पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मांग की गई है कि नियम तोड़ने वाली कंपनियों का MOU तुरंत रद्द किया जाए।
प्रशासन की बढ़ी चिंता
आमरण अनशन की चेतावनी के बाद प्रशासन और सरकार की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों द्वारा लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है।
आंदोलन और होगा तेज
स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि यह लड़ाई केवल पेड़ों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। जरूरत पड़ी तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का असर प्रदेश की राजनीति और पर्यावरण नीति पर भी पड़ सकता है।





