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Swami Parth Sarthy Case Live: FIR के वक्त लंदन में था बाबा, देर रात छात्राओं को कमरे में बुलाता था

On: March 22, 2026 8:45 AM
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दक्षिणी दिल्ली स्थित श्री शारदा भारतीय प्रबंधन संस्थान (जो श्री श्रृंगेरी मठ द्वारा संचालित है) के पूर्व संचालक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी पर कई छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्थान प्रशासन की शिकायत पर वसंत कुंज नॉर्थ थाना में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

अब तक कुल 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए गए हैं।

इनमें से 17 छात्राओं ने अभद्र भाषा, अश्लील व्हाट्सऐप/एसएमएस संदेश और अवांछित शारीरिक संपर्क का आरोप लगाया है।

FIR दर्ज होने के समय आरोपी कथित तौर पर लंदन में मौजूद था और फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

इंस्टीट्यूट से जीती गई CCTV/एनवीआर रिकॉर्डिंग फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दी गई है।

जांच के दौरान आरोपी के पास से एक वॉल्वो कार मिली, जिस पर अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगने का दावा है — यह प्लेट फर्जी पाई गई और जालसाज़ी के तहत मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में भी इसी संस्थान में एक छात्रा द्वारा पार्थ सारथी के खिलाफ मोलेस्टेशन का मामला दर्ज हुआ था।

पुलिस कार्रवाई और कानूनी स्थिति

पुलिस ने बताया है कि शिकायत के आधार पर थाना वसंत कुंज नॉर्थ में धारा 75(2)/79/351(2) बीएनएस के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। संस्थान से प्राप्त डेटा (CCTV/एनवीआर/हार्ड डिस्क) को एफएसएल/फॉरेंसिक लैब के लिए भेजा गया है। पटियाला हाउस कोर्ट में पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

इंस्टीट्यूट का रुख

संस्थान के प्रशासनिक सूत्रों ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वह सहयोग कर रहे हैं और आवश्यक जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई गई है। श्री श्रृंगेरी मठ के प्रतिनिधि ने भी कहा है कि संगठन इस प्रकार के आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है और जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।

कौन-कौन दर्ज हुआ बयान

जांच के दौरान संस्थान में तैनात कई कर्मचारी और तीन महिला वार्डन के बयान भी पुलिस ने दर्ज किए हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कुछ स्टाफ/प्रशासक दबाव बनाकर या उकसाकर आरोपी की मांगें पूरी करवाते थे — इस बात की भी जांच चल रही है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायतों और पब्लिक रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। यह मामला अभी जांच के अधीन है; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है।

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