बीकानेर

राजस्थान विधानसभा में ‘SI भर्ती रद्द’ पर हंगामा: रविंद्र भाटी और मनोज कुमार ने सरकार-विपक्ष को लिया आड़े हाथ, ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए उठाई ये मांग…

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जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को ‘एसआई भर्ती रद्द’ का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी और सादुलपुर से विधायक मनोज कुमार ने 2021 की सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती रद्द होने के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों को कटघरे में खड़ा किया। दोनों विधायकों ने ग्रामीण और गरीब परिवारों से आने वाले ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ न्याय की मांग उठाई, जिन्हें इस फैसले से नुकसान हुआ है। विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई, जिसमें भाटी ने सरकार पर ग्रामीण बच्चों की “हत्या” करने का गंभीर आरोप लगाया, वहीं मनोज कुमार ने भ्रष्टाचारियों को पकड़ने में नाकामी पर सवाल उठाए।

भाटी का सरकार पर हमला:”आपके हाथ खून से रंगे हैं”

शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट कंट्रोल्ड एंड रेगुलेशन बिल-2025 की बहस के दौरान एसआई भर्ती रद्द करने के फैसले को ग्रामीण और गरीब अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा, “जो अपराधी थे, उन्हें सजा मिली या नहीं? जो ग्रामीण परिवेश से आए साधारण बच्चे, जिन्होंने अपनी मेहनत, खून-पसीने की कमाई और कोचिंग के लिए अपनी पूरी पूंजी लगाकर नौकरी हासिल की, उनकी हत्या आपने की है। आपके हाथ खून से रंगे हैं।”भाटी ने जोर देकर मांग की कि जिन अभ्यर्थियों का इस मामले में कोई दोष नहीं है, उनके साथ सरकार को न्याय करना चाहिए। उन्होंने कहा, “ईमानदार अभ्यर्थियों को पूरा न्याय मिलना चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि बेगुनाहों को सजा न मिले।”

मनोज कुमार की मांग: “भ्रष्टाचारियों को पकड़ो या अभ्यर्थियों के साथ खड़े हो”

सादुलपुर से विधायक मनोज कुमार ने भी इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, “दोनों पार्टियां एसआई भर्ती रद्द होने का ढोल पीट रही हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों और लुटेरों के साथ खड़ी हैं। 859 ईमानदार अभ्यर्थियों, जो गरीब परिवारों से हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जबकि सिर्फ 55 बेईमानों को गिरफ्तार किया गया।”मनोज कुमार ने सरकार से सवाल किया कि जो अभ्यर्थी अपने माता-पिता की मेहनत की कमाई से पढ़-लिखकर और प्रशिक्षण लेकर नौकरी पाने में सफल हुए, उन्हें भ्रष्ट क्यों माना जा रहा है? उन्होंने मांग की, “या तो इन अभ्यर्थियों को भ्रष्ट मानकर गिरफ्तार करो, या फिर सरकार उनके साथ खड़ी हो। ईमानदार अभ्यर्थियों को बाहर निकालने का काम बंद करो।

पृष्ठभूमि: एसआई भर्ती रद्द का विवाद

2021 की राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को राजस्थान हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया था, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए थे। यह परीक्षा 859 पदों के लिए आयोजित की गई थी और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने इसे संचालित किया था। विशेष जांच दल (SIT) की जांच में पेपर लीक का खुलासा हुआ, जिसमें जयपुर से पेपर लीक होने और माफियाओं द्वारा 15-20 लाख रुपये में पेपर बेचे जाने की बात सामने आई। SIT ने अब तक 50 से ज्यादा ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों को गिरफ्तार किया है। 

इस फैसले के बाद से ही राजस्थान में सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच बयानबाजी तेज है। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत ने सरकार पर अस्पष्ट रवैये का आरोप लगाया, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि SIT के गठन से ही फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

चयनित अभ्यर्थियों का विरोधभर्ती रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने जयपुर, कोटा और अजमेर में प्रदर्शन किए। उन्होंने शहीद स्मारक पर धरना देते हुए मांग की कि कुछ लोगों की गलती का खामियाजा 800 परिवारों को क्यों भुगतना पड़ रहा है? परिजनों ने कहा कि उनके बच्चों ने मेहनत से परीक्षा पास की थी और अब उन्हें बिना गलती के सजा दी जा रही है।

सियासी बयानबाजी और भविष्य

यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में गर्माया हुआ है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी इस भर्ती को रद्द करने की मांग संसद में उठाई थी, लेकिन अब चयनित अभ्यर्थियों के परिजन इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और भविष्य में ऐसे अभ्यर्थियों को किसी भी भर्ती में शामिल होने से रोका जाएगा। 

एसआई भर्ती रद्द होने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में न केवल एक प्रशासनिक मामला है, बल्कि यह ग्रामीण और गरीब अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बन गया है। रविंद्र सिंह भाटी और मनोज कुमार ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उनकी मांग साफ है- दोषियों को सजा दो, लेकिन ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ न्याय करो। इस मामले में अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की डबल बेंच में होने वाली सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। 

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