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Bikaner में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 20 बैंक खातों और धर्म परिवर्तन नेटवर्क का खुलासा, करोड़ों का लेन-देन सामने

On: March 22, 2026 8:44 AM
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प्रकाशित: 20 सितंबर 2025 | Bikaner News


बीकानेर। दो दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मोहम्मद सादिक खान और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ा खुलासा किया। जांच में सामने आया कि धार्मिक ट्रस्टों के माध्यम से हवाला कारोबार, मनी लॉन्ड्रिंग और गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियां चलाई जा रही थीं।

ठोस सबूत और बैंक खातों का खुलासा

ईडी ने धोबी तलाई निवासी मोहम्मद सादिक खान के ठिकानों से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जब्त की। शुरुआती जांच में पता चला कि सादिक जमीयत अहले हदीस का प्रमुख है और अल फुरकान एजुकेशनल ट्रस्ट तथा मस्जिद-ए-आयशा ट्रस्ट के संचालन से जुड़ा था। इन ट्रस्टों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन सामने आया है।

जांच में करीब 20 बैंक अकाउंट्स सामने आए, जिन्हें सादिक सीधे नियंत्रित करता था। उसके पास वैध बड़ी व्यक्तिगत आय नहीं थी, लेकिन उसने कई विदेशी यात्राएं की और बांग्लादेश सहित कई देशों में आर्थिक लेन-देन के सबूत मिले। ईडी को संदेह है कि इन फंड्स का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया गया।

धर्म परिवर्तन और कट्टरपंथी नेटवर्क

छापेमारी में मिले सबूतों से यह भी सामने आया कि सादिक ने बांग्लादेश के एक संगठन को आर्थिक मदद दी। डिजिटल सामग्री से पता चला कि वह सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी वीडियो और उकसाने वाला कंटेंट साझा करता था। हथियारों की सप्लाई और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप भी उसके ऊपर हैं।

ईडी की प्रारंभिक जांच और सुरक्षा खतरा

ईडी का कहना है कि मोहम्मद सादिक और उसके नेटवर्क की गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। शुरुआती जांच में उसके तार प्रतिबंधित संगठनों और कट्टरपंथी उद्देश्यों का समर्थन करने वाले नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। एजेंसी अब हवाला चैनल, विदेशी फंडिंग और संदिग्ध एनजीओ के वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

आगे की जांच और संभावित खुलासे

जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। ईडी ने स्पष्ट किया कि मोहम्मद सादिक के नेटवर्क में शामिल अन्य लोग और फंडिंग चैनल भी पूरी तरह से ट्रैक किए जाएंगे। इस कार्रवाई का उद्देश्य हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और धार्मिक ट्रस्टों के दुरुपयोग को रोकना है।

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