Rajasthan LPG Crisis: 1500 शादियों पर संकट, गैस की कमी से बदला खाना का मैन्यू
जयपुर: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब राजस्थान के आम लोगों के घरों तक पहुंचने लगा है। एलपीजी गैस की किल्लत के चलते शादी-ब्याह और मांगलिक कार्यक्रमों में बड़ी परेशानी सामने आ रही है। खासकर जयपुर में अगले सप्ताह रामनवमी के अबूझ सावे पर होने वाली करीब 1500 शादियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
शादी के कार्ड बंटे, लेकिन गैस की किल्लत
शहर के कई परिवारों ने शादी के लिए पहले से ही मैरिज गार्डन, कैटरिंग और अन्य व्यवस्थाएं तय कर ली थीं। लेकिन अब एलपीजी गैस की कमी के कारण खाना बनाने में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
सोडाला स्वेज फार्म निवासी नवीन कुमावत ने बताया कि उनकी बहन की शादी 26 मार्च को है और करीब 900 मेहमानों को निमंत्रण भेजा जा चुका है। गैस की कमी के कारण उन्हें खाने के मैन्यू में बदलाव करना पड़ा है।
गर्म खाने की जगह ठंडा मैन्यू
गैस की किल्लत के चलते कई परिवारों ने गर्म व्यंजनों को हटाकर दाल-बाटी-चूरमा जैसे पारंपरिक ठंडे भोजन को शामिल करना शुरू कर दिया है। वहीं चाट और अन्य गर्म आइटम्स को मैन्यू से हटाया जा रहा है।
कैटरिंग और सिलेंडर की भारी समस्या
कैटरिंग सेवाओं को भी कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। गैस कंपनियों से भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण शादी आयोजकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
1500 शादियों पर मंडरा रहा संकट
जयपुर विवाह स्थल समिति के अनुसार, 25 और 26 मार्च को रामनवमी के अवसर पर शहर में करीब 1500 शादियां प्रस्तावित हैं। इनमें से 80 प्रतिशत मैरिज गार्डन पहले ही बुक हो चुके हैं।
भट्टी पर खाना बनाने की तैयारी
गैस की कमी को देखते हुए कुछ आयोजकों ने भट्टी पर खाना बनाने की योजना तैयार की है। हालांकि, मैरिज गार्डन के किचन एरिया सीमेंटेड होने के कारण इसमें भी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
प्रशासन से मदद की मांग
विवाह स्थल समिति ने प्रशासन से मांग की है कि गैस कंपनियों को निर्देश देकर पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शादी समारोह बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें।
क्या है संकट की वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत में एलपीजी गैस की उपलब्धता पर भी पड़ा है।
अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों पर इसका और बड़ा असर देखने को मिल सकता है।










