Bikaner News: ‘विचार मोक्ष का द्वारपाल होता है’—डॉ अर्जुन देव चारण
बीकानेर: शहर में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में कवि, नाटककार और आलोचक डॉ अर्जुन देव चारण ने कहा कि “विचार ही मोक्ष का द्वारपाल होता है।” उन्होंने साहित्य को जीवन का अहम आधार बताते हुए कहा कि यह केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक ऋषि कर्म है।
दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
रमेश इंग्लिश स्कूल के प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में लेखक मधु आचार्य ‘आशावादी’ की दो पुस्तकों ‘अर्जुन-आचार्य संवाद’ और कहानी संग्रह ‘बादल का एक टुकड़ा’ का लोकार्पण किया गया।
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साहित्य और जिज्ञासा का संबंध
डॉ चारण ने कहा कि जिज्ञासा का जीवित रहना ही व्यक्ति के जीवित रहने का प्रमाण है। साहित्य जिज्ञासाओं के उत्तर देने का माध्यम है, लेकिन वर्तमान समय में जिज्ञासा की कमी के कारण लोग साहित्य से दूर होते जा रहे हैं।
सरल भाषा में साहित्य की प्रस्तुति
मुख्य अतिथि राजाराम भादू ने कहा कि दोनों रचनाकार साहित्य को सरल और प्रभावी भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहानी संग्रह को कथ्य और शिल्प की दृष्टि से सराहनीय बताया।
लेखक ने साझा की रचना प्रक्रिया
मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने बताया कि ‘अर्जुन-आचार्य संवाद’ पुस्तक अनौपचारिक चर्चाओं पर आधारित है, जिसमें साहित्य की गूढ़ बातों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।
साहित्यकारों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ साहित्यकार और कला जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने पुस्तकों पर अपने विचार भी व्यक्त किए।
यह आयोजन बीकानेर के साहित्यिक माहौल को मजबूती देने वाला साबित हुआ, जिसमें विचार, संवाद और सृजन की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया।