देश में पहली बार? IAS अधिकारी ने छोड़ा प्राइवेट स्कूल, बेटी को भेजा आंगनबाड़ी
IAS पुलकित गर्ग ने महंगे प्ले-स्कूल छोड़कर बेटी का आंगनबाड़ी में एडमिशन कराया। जानिए क्यों यह फैसला देशभर में मिसाल बन गया।
महंगे प्ले-स्कूल को कहा ‘ना’… IAS पुलकित गर्ग ने बेटी का आंगनबाड़ी में कराया एडमिशन
Chitrakoot News: जब देशभर में माता-पिता बच्चों को महंगे और आलीशान स्कूलों में पढ़ाने की होड़ में लगे हैं, तब IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने एक अलग ही मिसाल पेश की है।
सरकारी शिक्षा पर दिखाया भरोसा
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का दाखिला सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। उन्होंने प्राइवेट प्ले स्कूल को ठुकरा दिया।
यह फैसला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है और लोग इसे ईमानदार प्रशासनिक सोच का उदाहरण मान रहे हैं।
कैसे लिया गया यह फैसला?
DM बनने के बाद पुलकित गर्ग ने कई निजी और सरकारी संस्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने खुद हर सुविधा की जांच की।
अंत में उन्हें जिलाधिकारी आवास के पास स्थित आंगनबाड़ी सबसे बेहतर लगी।
बेटी सिया की दिनचर्या
- अन्य बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई
- जमीन पर बैठकर भोजन
- खेल-खेल में शिक्षा
- संतुलित पोषण
सिया बाकी बच्चों की तरह सामान्य माहौल में पढ़ाई कर रही है।
आंगनबाड़ी की विशेषताएं
इस केंद्र में बच्चों के लिए:
- रंगीन दीवारें
- खिलौने
- शैक्षिक किट
- स्वास्थ्य जांच
- पोषण आहार
IAS पुलकित गर्ग का संदेश
उन्होंने बताया कि बच्चों की असली शिक्षा महंगे स्कूलों से नहीं, संस्कारों से मिलती है।
"बच्चों को सबसे पहले अच्छे इंसान बनना सीखना चाहिए।"
सोशल मीडिया पर वायरल
यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। हजारों लोग इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं।
सरकारी सिस्टम पर भरोसे की मिसाल
यह कदम सरकारी संस्थाओं पर भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
लोगों का कहना है कि जब IAS अधिकारी खुद सरकारी स्कूलों पर भरोसा करें, तो आम जनता भी प्रेरित होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा में वातावरण और देखभाल सबसे जरूरी होती है।
आंगनबाड़ी इस मामले में बेहद उपयोगी है।
देश के लिए प्रेरणा
IAS पुलकित गर्ग का यह निर्णय पूरे देश के लिए उदाहरण बन गया है।
यह साबित करता है कि सरकारी व्यवस्था मजबूत हो सकती है, यदि उसे सही समर्थन मिले।
आज के समय में जब शिक्षा व्यवसाय बन चुकी है, IAS अधिकारी का यह फैसला समाज के लिए नई दिशा दिखाता है।
यह कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि एक सोच की है।
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