Chhatargarh News: हाईवे किनारे फेंके जा रहे मृत पशु, बदबू और आवारा कुत्तों से बढ़ा खतरा; हड्डा रोड़ी बनी बड़ी समस्या
छतरगढ़: छतरगढ़ कस्बे में मृत पशुओं के निस्तारण के लिए स्थायी हड्डा रोड़ी (डंपिंग स्थल) नहीं होने से आमजन और प्रशासन के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। नेशनल हाईवे-911 पर बीकानेर रोड स्थित कस्बे से करीब एक किलोमीटर दूरी पर खुले में मृत पशु डालने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मृत पशुओं से उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास का माहौल खराब हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें रोजाना करीब दो किलोमीटर पैदल इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।
मृत पशुओं के आसपास आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जो अब आक्रामक भी हो चुके हैं। इससे राहगीरों में हर समय भय बना रहता है।
आवारा कुत्तों से हादसे का खतरा
छतरगढ़ निवासी रवि सारस्वत ने बताया कि हाल ही में आवारा कुत्तों के कारण एक बाइक सवार हादसे का शिकार होते-होते बचा। सड़क के बिल्कुल नजदीक मृत पशु डालना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
वहीं पास स्थित हनुमान धोरा धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी दुर्गंध और आवारा पशुओं की वजह से परेशानी हो रही है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर विधायक, प्रशासन और ग्राम पंचायत को कई बार अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक मृत पशुओं के निस्तारण के लिए कोई स्थायी स्थान तय नहीं हो पाया है।
उपखंड अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत यदि उपयुक्त जगह चिन्हित कर दे तो प्रशासन हड्डा रोड़ी को वहां स्थानांतरित करने की कार्रवाई कर सकता है।
वहीं सरपंच प्रतिनिधि सद्दाम हुसैन भाटी ने कहा कि ग्राम पंचायत स्थान देने को तैयार है, लेकिन जहां भी प्रस्ताव रखा जाता है वहां स्थानीय लोगों के विरोध के कारण समस्या बनी रहती है।
जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा
मृत पशुओं के निस्तारण की यह समस्या अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और यातायात सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। मौजूदा हालात में “एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई” वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।