गांवों में बड़ा बदलाव! अब टैक्स नहीं बढ़ाया तो पंचायतों का रुक सकता है करोड़ों का फंड
जयपुर/बीकानेर: ग्राम पंचायतों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब पंचायतों को सिर्फ सरकारी बजट के भरोसे नहीं रहना होगा, बल्कि अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने होंगे। 16वें वित्त आयोग के नए नियमों के अनुसार जो पंचायतें खुद की आय बढ़ाने में पीछे रहेंगी, उनकी परफॉर्मेंस ग्रांट रोकी जा सकती है।
पंचायतों को खुद बढ़ानी होगी कमाई
नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर राजस्व जुटाने पर जोर देना होगा। राज्य सरकार की ओर से जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को इसकी गाइडलाइन भेजी जा रही है।
सरकार की योजना के अनुसार पंचायत क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से न्यूनतम 1200 रुपये प्रति वर्ष तक की आय जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
इन टैक्स और चार्ज से होगी वसूली
- आवासीय और व्यावसायिक भवन टैक्स – गांवों में बने मकानों और दुकानों पर लगाया जाएगा।
- प्रकाश कर – स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के बदले लिया जाएगा।
- सफाई कर – कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था के लिए।
- स्थानीय कर – मेले, हाट बाजार और अन्य गतिविधियों पर।
- यूजर चार्ज – पानी जैसी सुविधाओं के लिए।
परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए पूरी करनी होगी शर्त
16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिलने वाले अनुदान में 20 प्रतिशत हिस्सा परफॉर्मेंस ग्रांट का होगा। इसे पाने के लिए पंचायतों को अपनी आय में बढ़ोतरी दिखानी होगी।
ग्राम पंचायत को पिछले साल की तुलना में अपनी आय कम से कम 1.025 गुना बढ़ानी होगी या फिर 2025-26 की आय पर हर साल 2.5 प्रतिशत चक्रवृद्धि वृद्धि दिखानी होगी।
80 प्रतिशत फंड सामान्य अनुदान के रूप में मिलेगा
वित्त आयोग के अनुसार कुल अनुदान का 80 प्रतिशत हिस्सा बेसिक ग्रांट होगा। इसमें 50 प्रतिशत राशि स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जल प्रबंधन जैसे कार्यों पर खर्च करनी होगी।
बाकी 50 प्रतिशत राशि पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार तय 29 विषयों पर खर्च कर सकेंगी।
ऑनलाइन देना होगा पूरा हिसाब
सरकार ने साफ किया है कि अब पंचायतों को सभी योजनाओं और खर्च का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखना होगा। इसके लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर 100 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग और योजनाएं अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना बताया जा रहा है।