Jaisalmer Bus Fire: दिवाली से पहले मातम में बदली खुशियां, 20 लोगों की मौत – सेना ने बचाई कई जानें
Jaisalmer Bus Fire: दिवाली से पहले मातम — 20 लोगों की मौत, कई घायल
जैसलमेर: दिवाली से पहले राजस्थान के जैसलमेर से एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहाँ जोधपुर जा रही एक नई AC स्लीपर बस अचानक आग की भेंट चढ़ गई। इस भयावह आग में अब तक 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई यात्री गंभीर रूप से झुलस कर अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
हादसा कैसे हुआ?
प्रारम्भिक घटनाक्रम के अनुसार बस वॉर म्यूजियम के पास पहुंची तभी पीछे के हिस्से से धुआँ निकलना शुरू हुआ। कुछ ही पलों में आग फैल गई और बस पूरी तरह से जलने लगी। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक ड्राइवर ने बस को रोकने के बजाय करीब आधा किलोमीटर आगे गाड़ी दौड़ाई, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
सेना ने बचाई कई जानें
स्थल पर मौजूद सेना के जवान और मेडिकल टीम तुरन्त सक्रिय हुए। सेनाके जवानों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा और फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकाला — कई यात्रियों की जान इसी समय बचाई गयी।
कौन-कौन घायल और मौतें
- कुल मृतकों की संख्या: 20 (प्रारम्भिक रिपोर्ट)।
- गंभीर रूप से घायल कई यात्री जोधपुर के एमजीएच (MGH) और बर्न यूनिट में भर्ती हैं।
- जैसलमेर के पत्रकार राजेंद्र की मौत की पुष्टि हुई है।
- भाजपा नेता मनोज भाटिया गंभीर रूप से झुलसे और अस्पताल में इलाज जारी है।
“5 मिनट पहले बेटे से बात की थी…” — दुर्घटना के बाद अस्पताल के बाहर परिजन फूट-फूट कर रोते पाए गए।
पहचान के लिए DNA जांच
कुछ शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि पहचान असम्भव है। FSL जोधपुर की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और पहचान के लिए DNA जांच शुरू कर दी गई है। अभी तक केवल एक शव की पहचान हुई है।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
जैसलमेर कलेक्टर और पुलिस निवारक टीम ने मौके का दौरा किया और राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की। पुलिस और परिवहन विभाग ने बस के मेंटेनेंस, ड्राइवर के बयान और आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय प्रतिक्रियाएँ
परिजनों, स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। कई लोग प्रशासन से त्वरित सहायता और पीड़ितों के परिजनों के लिए मुआवज़ा की माँग कर रहे हैं।
क्या ये सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड और नजदीकी राहत टीमें थोड़ी तेज़ी से पहुंच पातीं तो और जिंदगियाँ बच सकती थीं। विस्तृत रिपोर्टों में यह भी देखा जाएगा कि बस की फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्ज़िट, और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं।
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