6 जिलों के 108 डॉक्टर SOG के रडार पर: फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से प्रैक्टिस का बड़ा खुलासा
जयपुर: विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे और फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास किए बिना ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जांच में सामने आया है कि राजस्थान के छह जिलों के करीब 108 डॉक्टर अब SOG के रडार पर हैं। इस मामले में अब तक 25 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें डॉक्टरों के साथ-साथ राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के पूर्व अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।
फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए मिली प्रैक्टिस की अनुमति
जांच एजेंसियों के अनुसार कई ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने कजाकिस्तान, रूस सहित अन्य देशों से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी, भारत लौटने के बाद FMGE परीक्षा पास नहीं कर सके। इसके बावजूद उन्होंने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया और प्रैक्टिस शुरू कर दी।
SOG की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसमें दलालों, डॉक्टरों तथा कुछ विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत होने की आशंका है।
डॉक्टर ने खुद बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट, फिर बनने लगा दलाल
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी नरेश गुर्जर ने पहले खुद के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और बाद में अन्य डॉक्टरों को भी ऐसे दस्तावेज उपलब्ध करवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। आरोप है कि उसने अपने परिचितों और साथ पढ़े डॉक्टरों को भी फर्जी रजिस्ट्रेशन दिलवाया तथा इसके बदले लाखों रुपये की दलाली वसूली।
सूत्रों के अनुसार एक डॉक्टर से फर्जी रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज तैयार करवाने के लिए 20 लाख से 30 लाख रुपये तक लिए जाते थे।
छह जिलों तक फैला नेटवर्क
SOG की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क मुख्य रूप से दौसा, अलवर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर और जयपुर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला हुआ था। विदेश से पढ़ाई कर लौटे कई अभ्यर्थी इस रैकेट के संपर्क में आए और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल प्रैक्टिस करने लगे।
अब जांच एजेंसी इन सभी मामलों की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कितने लोगों ने मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया।
24 से 27 लाख रुपये तक में हुआ सौदा
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी दीपक यादव वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर भारत लौटा था। FMGE परीक्षा में कई बार असफल होने के बाद उसने कथित रूप से 24 लाख रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किया।
इसी प्रकार राजू गुर्जर ने भी कथित रूप से 27 लाख रुपये में फर्जी दस्तावेज बनवाए। वहीं नरेश गुर्जर ने अपने लिए और अन्य लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के एवज में लाखों रुपये की दलाली ली।
मुख्य सरगना पहले ही गिरफ्तार
SOG ने इस मामले में मुख्य सरगना भानाराम माली को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार भानाराम का सिंडिकेट विदेश से लौटे उन छात्रों को निशाना बनाता था जो FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाते थे।
इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में जमा करवाए जाते थे और मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया जाता था।
25 आरोपी गिरफ्तार
अब तक की कार्रवाई में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन सहित कुल 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 20 डॉक्टर, मुख्य सरगना भानाराम माली और अन्य दलाल शामिल हैं।
SOG का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जांच जारी, बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां
जांच एजेंसियां अब उन 108 डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर रही हैं जो कथित रूप से इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो इनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल SOG पूरे रैकेट की परतें खोलने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कितने डॉक्टरों ने मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश किया और कितने समय तक प्रैक्टिस करते रहे।