सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ उछाल क्यों? 2026 में आगे क्या होगा
सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर क्यों पहुंचीं? जानिए 2025–26 में तेजी की वजह, वैश्विक तनाव, फेड नीति और आगे का अनुमान।
सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ उछाल क्यों? जानिए अब आगे क्या होगा
Today Gold Price: भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। वैश्विक अनिश्चितता, राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने इन कीमती धातुओं की चमक और तेज कर दी है। सवाल यह है कि आखिर यह तेजी क्यों आई और आगे क्या होगा?
भारत में सोना-चांदी ने तोड़े सभी पुराने रिकॉर्ड
भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में एक ही दिन में 15 हजार रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई। वहीं 99.9% शुद्धता वाला सोना 1,44,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
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2025 में क्यों बढ़े थे सोना-चांदी के दाम?
1. चांदी की औद्योगिक मांग में उछाल
चांदी को 2025 में 'ग्रीन मेटल' के रूप में नई पहचान मिली। अमेरिका द्वारा इसे क्रिटिकल मिनरल की सूची में शामिल किए जाने और सोलर पैनल व ईवी सेक्टर में मांग बढ़ने से इसकी कीमतों को जबरदस्त सहारा मिला।
2. केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी
चीन, रूस और BRICS देशों के केंद्रीय बैंकों ने डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए सोने की बड़े पैमाने पर खरीदारी की, जो पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक रही।
3. ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती और मध्य-पूर्व सहित अन्य क्षेत्रों में तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा।
2026 में क्यों जारी है तेजी?
अमेरिकी फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता, डॉलर में कमजोरी और वैश्विक आर्थिक डर ने सोने-चांदी की मांग को और बढ़ा दिया है। निवेशक इन्हें सुरक्षित ठिकाने के रूप में देख रहे हैं।
चांदी की कीमतों को लेकर आगे क्या अनुमान है?
- मोतीलाल ओसवाल के अनुसार चांदी 3.20 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर 87–89 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
- औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति चांदी को सोने से भी बेहतर प्रदर्शन करा सकती है।
निष्कर्ष
सोना और चांदी दोनों ही 2026 में निवेशकों के लिए मजबूत विकल्प बने हुए हैं। हालांकि कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन वैश्विक हालात इन्हें अभी भी सहारा दे रहे हैं। निवेश से पहले जोखिम को समझना जरूरी है।
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