डूंगरगढ़

श्रीडूंगरगढ़ में त्रिशंकु जनादेश, कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी; सत्ता की चाबी विकास मंच-निर्दलीयों के हाथ

श्रीडूंगरगढ़ में त्रिशंकु जनादेश, कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी; सत्ता की चाबी विकास मंच-निर्दलीयों के हाथ

श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने इस बार त्रिशंकु जनादेश दिया है। किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है। चुनाव परिणामों में कांग्रेस 15 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, जबकि भाजपा ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है।

इसके अलावा विकास मंच के 9 प्रत्याशी, 2 निर्दलीय तथा माकपा के एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है।

कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन समीकरण दिलचस्प

नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस ने 15 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है। भाजपा को 13 सीटें मिली हैं। वहीं विकास मंच के 9 प्रत्याशियों की जीत ने चुनाव परिणाम को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

दो निर्दलीय और माकपा के एक प्रत्याशी की जीत के बाद अब बोर्ड गठन के लिए समर्थन जुटाने की कवायद महत्वपूर्ण हो गई है।

विकास मंच और निर्दलीयों की भूमिका अहम

चुनाव परिणाम के बाद नगर पालिका का सत्ता समीकरण विकास मंच और निर्दलीय पार्षदों के रुख पर काफी हद तक निर्भर करता नजर आ रहा है। बोर्ड गठन के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों को अपने पक्ष में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा।

खास तौर पर विकास मंच से जुड़े पार्षदों की भूमिका इस बार बेहद अहम मानी जा रही है। उनके समर्थन से बोर्ड गठन का समीकरण बदल सकता है।

किसके साथ जाएंगे विकास मंच के पार्षद?

श्रीडूंगरगढ़ के चुनाव परिणामों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास मंच और निर्दलीय पार्षद किसके साथ खड़े होंगे? कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बोर्ड गठन के लिए उसे अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की रणनीति बनानी होगी। दूसरी ओर भाजपा भी सत्ता तक पहुंचने के लिए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।

बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ की संभावना

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो सकती है। पार्षदों के रुख और राजनीतिक दलों की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

अब देखना होगा कि विकास मंच और निर्दलीय पार्षद किसके साथ जाते हैं और श्रीडूंगरगढ़ नगर पालिका की सत्ता की चाबी किसे मिलती है। बोर्ड गठन के बाद ही पालिका की अगली राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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