Bikaner LPG Price Hike: घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कॉमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी
बीकानेर में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी। घरेलू गैस 60 रुपये महंगी होकर 926 रुपये पहुंची, जबकि कॉमर्शियल सिलेंडर 114 रुपये बढ़कर 1947 रुपये हो गया।
बीकानेर में एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़े, घरेलू गैस 926 रुपये और कॉमर्शियल 1947 रुपये
बीकानेर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। बीकानेर में घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के एलपीजी सिलेंडरों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं से लेकर होटल और छोटे व्यवसायों तक पर असर पड़ने की संभावना है।
घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा
स्थानीय गैस एजेंसी संचालक रमेश पेड़ीवाल के अनुसार, नए रेट्स लागू होने के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 866 रुपये से बढ़कर 926 रुपये हो गई है। यानी उपभोक्ताओं को अब प्रति सिलेंडर 60 रुपये अधिक चुकाने पड़ेंगे।
कॉमर्शियल सिलेंडर पर भी असर
व्यावसायिक उपयोग में आने वाले 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी बढ़ी है। पहले यह सिलेंडर 1833 रुपये में मिल रहा था, जो अब बढ़कर 1947 रुपये हो गया है। यानी इसमें 114 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि अलग-अलग कंपनियों जैसे Indane, Bharatgas और HP Gas के रेट में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर कीमतों में वृद्धि सभी उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रही है।
बुकिंग नियमों में बदलाव
कीमतों में बढ़ोतरी के साथ गैस बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए 21 दिन का इंतजार करना होगा। यह बदलाव स्टॉक मैनेजमेंट और सप्लाई को संतुलित रखने के लिए किया गया है।
वैश्विक कारणों से बढ़े दाम
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी के कारण एलपीजी महंगी हो रही है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति मार्गों में बाधा भी इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
व्यापारियों पर पड़ेगा ज्यादा असर
कॉमर्शियल सिलेंडर महंगे होने से होटल, रेस्तरां, ढाबे, कैटरिंग और छोटे खाद्य व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
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